Ek Nazar Kripa Ki Kar Do Laadli Shree Radhe - Maanya Arora | Lyrics | Mp3 Download

Title Name  - Laadli Shree Radhe Singer Name - Maanya Arora  Lyric -  Print Lyrics ek nazar kripa ki kar do laadli shree ...

Mahaamari Coronavirus Ki Bhavishvaani

संत रविदास जी की भविष्यवाणी  - English

दोस्तों आज जो कोरोना वायरस का प्रकोप चल रहा है, इस से मिलती हुई कविता को संत रविदास जी ने पहले ही लिख दिया था , जिसके कुछ लाइन इस प्रकार है -

कविता-1 के कुछ पंक्ति 

चीन अरब की धुरी बनेगी। विध्वंसक ताकत उभरेगी ।। 
सभी तरफ संगीन लड़ाई। घाटें में होंगे ईसाई ।। 
ईटली में कोहराम मचेगा। लंदन सागर में डूबेगा ।।
युद्ध तीसरा प्रलयंकारी।  जो होगा भारी संहारी ।। और ...

अब इस कविता के लिखे हुए पंक्ति मे जो मुझे समझ आया और वही हालात इस प्रकार के अभी पूरी दुनिया मे है तो मैं आपको समझाने की कोशिस करता हूँ -
1- चीन अरब की धुरी बनेगी। विध्वंसक ताकत उभरेगी 
आप सब तो जानते ही है की कोरोनावायरस की शुरुआत चीन से ही हुई है और बहुत ही खतरनाक ये वायरस है जिसका अभी कोई तोड़ नही मिल पाया है । 

2- सभी तरफ संगीन लड़ाई। घाटें में होंगे ईसाई ।। 
सभी तरफ यानि की पूरी दुनिया मे इसका असर दिखाई दे रहा है और जो बहुत अमीर व हर तरफ से सक्षम व्यति है वो भी इस बीमारी से घबराया हुआ है । 

3- ईटली में कोहराम मचेगा। लंदन सागर में डूबेगा ।।
आज की बात से तो सही लग रहा है क्यूँ की इटली मे ही कोरोनावायरस के कारण सबसे ज्यादा मौतए हुई हैं । 

4- युद्ध तीसरा प्रलयंकारी।  जो होगा भारी संहारी ।।
एक तरह से ये विश्व का तीसरा युद्ध ही है जिसमे सभी देश को नुकसान हो रहा है, जान की हानि हो रही है धन की हानि हो रही है । 

कविता 2 - की कुछ पंक्ति 

सभी तरफ कोहराम मचेगा। कैसे हिन्दुस्तान बचेगा ।। 
नेता, मंत्री और अधिकारी। जान बचाना होगा भारी।। 
छोड़ सब मैदान भागेंगे। सब अपने अपने घर दुबकेंगे ।। और...

इस कविता का जो मतलब है वो मैं बताना चाहता हूँ , मुझे जो कुछ समझ मे आया वो इस प्रकार है -
1- सभी तरफ कोहराम मचेगा। कैसे हिन्दुस्तान बचेगा ।। 
सभी तरफ परेशानी तो है ही, और अब भारत मे भी ये परेशानी दिनों दिन बढ़ती जा रही है , कैसे इस परेशानी से बचा जा सकता है । 

2- नेता, मंत्री और अधिकारी। जान बचाना होगा भारी।। 
हर व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए तमाम कोशिस कर रहा है पर मुसकिले बढ़ती जा रही है । 

3-छोड़ सब मैदान भागेंगे। सब अपने अपने घर दुबकेंगे ।।
ये बात भी अब सही लहने लगी है, सभी लोग देश के हो या विदेश के वो सब अपने अपने घरों मे ही घुसे हुए है , डर कर की कहीं ये बीमार उनको ना हो जाए । 

नोट:-
यह कविता इंटरनेट से ढूंढ कर लिया गया है, इस कविता मे कितनी सच्चाई है ये तो मुझे नही पता , पर जैसा जैसा लिखा हुआ है वैसा ही हो रहा है । 


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